तुमको किनारा कर गई
तुमको किनारा कर गई…!ये लहकती, थे मचलती, ‘सरित-सी कल-कलकलाती’,तुम तटस्थत् देखते, तुमको किनारा कर गई!तुम व्योम को ताका करे, के नापते गहराई अपनी,सरित का पर जल तो सूखे!”व्योम कुछ बरसों …
तुमको किनारा कर गई…!ये लहकती, थे मचलती, ‘सरित-सी कल-कलकलाती’,तुम तटस्थत् देखते, तुमको किनारा कर गई!तुम व्योम को ताका करे, के नापते गहराई अपनी,सरित का पर जल तो सूखे!”व्योम कुछ बरसों …
शांत, निस्पृह, मंद…. न कोई हलचल,न ध्वनि कहीं से।न आवेग कोई, न उग्रता का तनिक अंश ही। तूफान का कुछ नाम तक दिखता नहीं…। क्या जल ही सारा तलहटी में …