राह से संवाद- २
ये मील के पत्थर कुछ राहत तो देते हैं,मगर ले जाएंगे मुझे मेरी मंज़िल तलक…?-कौन कह पाएगा…!वो आवाज़ जो ख़ामोशी से निकलती है -भीतर से कहींऔर जानती है राज़ मेरी …
ये मील के पत्थर कुछ राहत तो देते हैं,मगर ले जाएंगे मुझे मेरी मंज़िल तलक…?-कौन कह पाएगा…!वो आवाज़ जो ख़ामोशी से निकलती है -भीतर से कहींऔर जानती है राज़ मेरी …
डरा-डरा सा आशंकित-सा चलता था मैं देख, साथ तुम चलती हो ना!आँखे थोड़ी तिरछी करके रहा बराबर देख, साथ तुम चलती हो ना!कई कदम हम साथ चले देखा मैंने तुम …
अस्तित्व वाचाल नहीं है.वो तो है मौन, निःशब्द संगीत!तुमने उसके मौन में भर दी हैअपनी ही ध्वनि और सुनते हो सिर्फ शोर!! ०९०३२२/०९०३२२
तुम देखते हो खिड़की से बाहर चमकते चाँद को,और भर जाते हो आह्लाद से-उस चमकते चाँद के लिए!दीवार से निकले उस झरोखे कोकब धन्यवाद दोगे..! ०९०३२२/०३०९२२