झरना, प्रेम और समंदर- एक अनंत यात्रा
उस ऊँचे पहाड़ से गिरतीअविरल जलधारा, ‘झरना’-अपने आगे के रास्ते से पूर्ण अनभिज्ञ,बस छोड़ देता है अपने आप कोकिसी अनजान शक्ति परपूर्ण विश्वास कर!कब तक, कितनी गहराई तक उसे गिरते …
उस ऊँचे पहाड़ से गिरतीअविरल जलधारा, ‘झरना’-अपने आगे के रास्ते से पूर्ण अनभिज्ञ,बस छोड़ देता है अपने आप कोकिसी अनजान शक्ति परपूर्ण विश्वास कर!कब तक, कितनी गहराई तक उसे गिरते …
वो सुनती रही मेरी एक-एक कविता,हर एक कविता का एक-एक शब्द।हर एक शब्द का गहनतम अर्थ, वो सुन रही थी अंतरतम गहराईयों से!और उसके मुख से निकले ‘वाह’ के स्वर …
और प्रज्ञा जग उठी और बोलती-“एक प्रतिवासी का घर है,एक घर खुद का यहाँ,एक घर परमात्मा का,बस यही ब्रह्मांड है!””तुमने प्रतिवासी के घर को,खुद का घर समझा हुआ है।”भ्रांति तुमको …
हम तो हैं बंजारे मौला, हम तो हैं बे-द्वारे मौला, हम तो हैं नदिया की चालें, चल पड़े हरिद्वार मौला।तन्हा-तन्हा घूमते,मस्ती, कभी हम झूमते, सोए रहे अलसाए से,करते हिमालय पार …