कौन जाने किस सदी से!
वक्त के धागे जुड़े हैंकौन जाने किस सदी से;दिख रहा सागर यहाँ,पर मिल रहा किस-किस नदी से।लम्हा लम्हा यूँ सरकता,यूँ सिसकता बढ़ रहा है, कौन मानेगा जुड़े,परमात्मा या उस नबी …
वक्त के धागे जुड़े हैंकौन जाने किस सदी से;दिख रहा सागर यहाँ,पर मिल रहा किस-किस नदी से।लम्हा लम्हा यूँ सरकता,यूँ सिसकता बढ़ रहा है, कौन मानेगा जुड़े,परमात्मा या उस नबी …
सब कुछ श्रेष्ठ प्राप्य है मुझको- धन, वैभव, संबंधी!तृप्त-पूर्ण हूँ घर-वाहन से, हर सुविधा सम्पन्न,माँ, भार्या, सुत, भाई-बहन से,तृप्त सभी संबंध। मित्र वर्ग- मैं भाग्यावान हूँ,साथ निवासी सत्जन, कर्मक्षेत्र सहयोगी …
इन तंग-तंग-सी गलियों में, तुम फ़िकर छोड़ दौड़े जाते;ये देह-परिधि जो बढ़ जाती,तुम दौड़-दौड़ भूले जाते।जो दौड़ बहुत आगे बढती,होतीं ये तंग बहुत गलियाँ;तुम आगे बढ़ने की धुन में,इन गलियों …
सारी गागर रीत चुकी है, अब थोड़ा अमृत-जल भर दो।तुमने मुझको खाली करने ध्यान सिखाया, ध्यान विधी भी सारी अब तो भूल चुकी हैं; आत्मद्वार की चाबी पाने दौड़ रहा …