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लघु कविताएँ - अनहद की कलम से

आज अम्बर नाचता है…

बादलों की गरजना की ढोल की-सी ताल पर,पवन संगत कर रही है तरुवरों से वाद्य पर;पाँव धरती पर पड़ें, उठते मधुर झंकार कर,आज अम्बर नाचता है, घुंघुरुओं को बाँध कर।सूर्य …

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क्यूँ व्याकुल हूँ मैं!

प्रेम में तो व्यग्रता होती ही है,जो प्रेम ना है तो भी क्यूँ व्याकुल हूँ मैं?ब्याहने की चाह तुमको है नहीं,हो गईं ओझल तो क्यूँ आकुल हूँ मैं?आज भी मिलने …

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स्वप्न

दिखे जो आँख बंद होने पर, शरीर के सोने, मन के लेट जाने पर,वही स्वप्न है, एक मृदु असत्य।व्यक्तियों की असमय जमावट, परिवर्तित मूल की बनावट,वही स्वप्न है, एक अकथित कथ्य। उसी स्वप्न …

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