आज अम्बर नाचता है…
बादलों की गरजना की ढोल की-सी ताल पर,पवन संगत कर रही है तरुवरों से वाद्य पर;पाँव धरती पर पड़ें, उठते मधुर झंकार कर,आज अम्बर नाचता है, घुंघुरुओं को बाँध कर।सूर्य …
बादलों की गरजना की ढोल की-सी ताल पर,पवन संगत कर रही है तरुवरों से वाद्य पर;पाँव धरती पर पड़ें, उठते मधुर झंकार कर,आज अम्बर नाचता है, घुंघुरुओं को बाँध कर।सूर्य …
प्रेम में तो व्यग्रता होती ही है,जो प्रेम ना है तो भी क्यूँ व्याकुल हूँ मैं?ब्याहने की चाह तुमको है नहीं,हो गईं ओझल तो क्यूँ आकुल हूँ मैं?आज भी मिलने …