सफ़र तक़मील करने दो
तुम्हारे इश्क मे पड़ कर,तुम्हारे घर को आए थे,तुम्हें हमराह जो जाना–सफ़र तक़मील करने दो।ये फ़ितरत है– जो इस दिल से,खता हमसे कराती है,इसी फ़ितरत को अपने इश्क में,अब तो …
तुम्हारे इश्क मे पड़ कर,तुम्हारे घर को आए थे,तुम्हें हमराह जो जाना–सफ़र तक़मील करने दो।ये फ़ितरत है– जो इस दिल से,खता हमसे कराती है,इसी फ़ितरत को अपने इश्क में,अब तो …
लंबे-लंबे रस्ते चलते-कभी घिसटते, कभी उछलते,कभी कहीं बस थम जाते हम।ऐसे ही अनगिनत रास्ते, हमसे होकर निकल गए हैं,हम भी इनकी सिर रीढ़ों पर,मचल-मचल कर फिसल गए हैं।क्या मंज़िल ये …