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एक अजन्मे को पत्र
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लघु कविताएँ - अनहद की कलम से

आत्मा में रामलला

प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,मचा बड़ा कोहराम, भीतर आँखें फेरिए,मिटें सभी संग्राम।हृदय हमारे रामलला,अभी रहे पाषाण, राम-नाम ना रटन रहे,बने हृदय के प्राण।प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,कर लो भक्त-सुजान, भीतर की श्री राम से,जागे …

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शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता!

शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना सकुचाहट, ना गर्माहट, ना पिघला, ना बहता। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना रिश्ते के इस स्वरूप पर, तुझे-मुझे कुछ शिकवा, ना इसको कुछ दृढ़ करने की, तेरी-मेरी …

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नाटक

एक मित्र ने लिखा “यूँ ही सोच रहा था…खास बात ये नहीं कि नाटक करने वाला थक नहीं रहा; बड़ा आश्चर्य तो ये है कि देखने वाले अभी तक ऊबा …

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यारा खूब खिला करते

वही रेत है, वही घड़ी है, वही सरकना चुपके से, बार-बार उल्टा-पुल्टा कर, यार खूब मिला करते।बरसों बाद मिले तुम सबसे, पर जैसे कल का नगमा; जिसे साथ में, सुर …

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