आत्मा में रामलला
प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,मचा बड़ा कोहराम, भीतर आँखें फेरिए,मिटें सभी संग्राम।हृदय हमारे रामलला,अभी रहे पाषाण, राम-नाम ना रटन रहे,बने हृदय के प्राण।प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,कर लो भक्त-सुजान, भीतर की श्री राम से,जागे …
प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,मचा बड़ा कोहराम, भीतर आँखें फेरिए,मिटें सभी संग्राम।हृदय हमारे रामलला,अभी रहे पाषाण, राम-नाम ना रटन रहे,बने हृदय के प्राण।प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,कर लो भक्त-सुजान, भीतर की श्री राम से,जागे …
शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना सकुचाहट, ना गर्माहट, ना पिघला, ना बहता। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना रिश्ते के इस स्वरूप पर, तुझे-मुझे कुछ शिकवा, ना इसको कुछ दृढ़ करने की, तेरी-मेरी …
वही रेत है, वही घड़ी है, वही सरकना चुपके से, बार-बार उल्टा-पुल्टा कर, यार खूब मिला करते।बरसों बाद मिले तुम सबसे, पर जैसे कल का नगमा; जिसे साथ में, सुर …