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एक अजन्मे को पत्र
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लघु कविताएँ - अनहद की कलम से

पावन-सा हुआ जाता है

नये वर्ष में सब पावन हुआ जाता है-तुम, तुम्हारी यादें और तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा-सब वर्तमान के इस एक पल में घुला जाता है।नये वर्ष में सब पावन-सा हुआ …

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चंद दोहे

राई इतनी लीजिये, ना पहाड़ हो जाए;खानें में इतनी रहे, पड़े स्वाद बढ़ जाए। जीरा मुँह में डाल कर, ऊँट की निकली जान,भोजन इतना तो करो, रहेें देह में प्राण। …

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आँखमिचौली

मैं धुंधला-धुंधला देख रहा, उस भीनी-भीनी खुशबू को;हौली-हौली-सी आवाज़ें, सहला जाती हर रोएँ को!वो छिप जाती, वो फिर आती, क्या खेले छिपन-छिपैया वो? रोते-मुस्काते ढूँढ-ढूँढ,मचले उसके आलिंगन को।ये पास रही, …

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चाँद, तुम और दूरी

एक- चाँद पूनम के चंदा को देखा।भीतर दौड़ा, पहनी चप्पल, दौड़ के आकर बाहर देखा,चाँद अमावस चला गया! दो- तुम तुमने दिखलाया मुझे चाँद अपनी अंगुली से, फिर पकड़ कर …

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