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लघु कविताएँ - अनहद की कलम से

वृक्ष के दैवीय संदेश- दो शैलियाँ

वृक्ष समेटे हैं बहुत से दैवीय संदेश। बस करते हैं प्रतीक्षा, किसी खोजी, किसी सुनने वाले की। मिलते ही बता देते हैं, धरती पर गिरने के नियम;साथ बहते ही खोल …

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द्विविधा, शिकायत और दर्द के स्वर

जहाँ में काम करना है, जहाँ में हो रहा सब खुद,जहाँ होना है करता हूँ, जहाँ करना है तकता हूँ। जहाँ करने में हक मेरा, वहाँ मैं चूक जाता हूँ, …

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पल-पल डग बढ़ते जाओ

पल-पल डग बढ़ते जाओ, पग डग-मग हों सधते जाओ, प्रभु स्वयं दिखाता मार्ग तुम्हें, प्रभु मार्ग-चिह्न पढ़ते जाओ। पल-पल डग बढ़ते जाओ।सौभाग्य बड़ा प्रभु-मार्ग दिखा, साहस प्रभु से उपहार मिला, …

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श्री बद्रीनाथ गिरी

दिन बीता।बीता, दिन के साथ-साथ, जीवन बीता।भोर समय कोहरे ने गिरी का तन ढापा, सूरज के सम्मुख नतमस्तक-पिघला जाता।आदित्य और हिमपर्वत की उज्जवल आभा,मुख खिला देख दृश को, सुख की …

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