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एक अजन्मे को पत्र
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लघु कविताएँ - अनहद की कलम से

परछाई

वो मेरी दोस्त है।पर उसने, कभी कहा नहीं कुछ मुझसे…!चुपचाप हमेशा, मेरे साथ रहती है!उसने कभी रोका नहीं मुझे,कितने ही ऊबड़-खाबड़,ऊँचे-नीचे रास्तों पर जाने से!उसके मुख से कभी मुझे सुनाई …

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प्रभु! तुम बूँद-बूँद रिसते-से हो

प्रभु! तुम बूँद-बूँद रिसते-से हो बसमेरे भीतर।तुम बाहर तो हो इतने विराट,इतने विस्तृत-और मैं खुला हूँ और खाली भी।यही मान मैं पुकारता हूँ तुम्हे,इस आस में कि तुम आओगे,एक तेज …

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दर्द

दर्द गहराई देता है।पर उस दर्द की सतह पर ना रुक जाओ।उतरो उस दर्द की गहराई में;गहरे… और गहरे, तब पाओगे,सिर्फ गहराई है,दर्द तो नदारद है! १८१००८/१८१००८

ओंकार

इस ‘ॐ’ नाद के करने से, पाषाण शिलाएँ टूट रहीं;मन चट्टानों के ढहने से, ओंकार ध्वनि ही गूंज रही।अंतरतम के स्पंदन हैं, ओंकार नाद की टकराहट;कुछ पिघला, शीतल बहता है, …

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