कितना धीरज!
कितना धीरज…!बूँद-बूँद घट भर जाता है,पर क्या धीरज रख पाता है?!बीते बरस खेत बुआया, बारिश की सहजी आस,खेत दरारें, खेत हो गए, ना आई बरसात।रूठी खेती, रूठा भाग;रोया मन, असुअन …
कितना धीरज…!बूँद-बूँद घट भर जाता है,पर क्या धीरज रख पाता है?!बीते बरस खेत बुआया, बारिश की सहजी आस,खेत दरारें, खेत हो गए, ना आई बरसात।रूठी खेती, रूठा भाग;रोया मन, असुअन …
मैंने बनाई है अपने आँसुओं से इक माला-उन आँसूओं से जो निकले थे तुम्हारे विरह में।तुम आओ तो पहना दूँ उसे तुम्हारे गले में। तुम उसे उतारना मत,छूने देना उसके …
एक- ये चाँद अपने गाँव भी यही चाँद ले जाना -मैं याद रहूँगा!कभी अमावस में भी आसमाँ मे टाँक देना..!मैंने तारों को मना लिया हैऔर झील को समझा दिया है.!! …