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एक अजन्मे को पत्र
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प्रकृति - अनहद की कलम से

केदारनाथ-२- वन और हमारी साँसें

यहाँ-माँ ने बेटे को प्यार सेलोरी गा, सुलाया,और फिर प्रेम से उसकोनिहारती रही…देर तक- “नन्हा-नन्हा-सा चेहरा,नन्हे-नन्हे-से हाथ और पाँव,और नन्हा, प्यारा-सा, छोटा-साउठता और सिमटता सीना।”‘श्वास!’- माँ सोच उठती,’यही सीने का …

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नवीन-यात्रा

नानू, नर्मदा और नवकक्ष-नवीन-सी मित्रता, दो पुरातन से परिचितों की!सब नया-नए परिपक्व, प्रेमपूर्ण नानू,नई निरत माँ नर्मदा,और नए परिवेश में सुसज्जित नया कक्ष…!इस नवीनता में हमने अपने प्रेम और श्रद्धा …

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झरना, प्रेम और समंदर- एक अनंत यात्रा

उस ऊँचे पहाड़ से गिरतीअविरल जलधारा, ‘झरना’-अपने आगे के रास्ते से पूर्ण अनभिज्ञ,बस छोड़ देता है अपने आप कोकिसी अनजान शक्ति परपूर्ण विश्वास कर!कब तक, कितनी गहराई तक उसे गिरते …

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वृक्ष के दैवीय संदेश- दो शैलियाँ

वृक्ष समेटे हैं बहुत से दैवीय संदेश। बस करते हैं प्रतीक्षा, किसी खोजी, किसी सुनने वाले की। मिलते ही बता देते हैं, धरती पर गिरने के नियम;साथ बहते ही खोल …

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