केदारनाथ-२- वन और हमारी साँसें
यहाँ-माँ ने बेटे को प्यार सेलोरी गा, सुलाया,और फिर प्रेम से उसकोनिहारती रही…देर तक- “नन्हा-नन्हा-सा चेहरा,नन्हे-नन्हे-से हाथ और पाँव,और नन्हा, प्यारा-सा, छोटा-साउठता और सिमटता सीना।”‘श्वास!’- माँ सोच उठती,’यही सीने का …





