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प्रकृति - अनहद की कलम से

श्री बद्रीनाथ गिरी

दिन बीता।बीता, दिन के साथ-साथ, जीवन बीता।भोर समय कोहरे ने गिरी का तन ढापा, सूरज के सम्मुख नतमस्तक-पिघला जाता।आदित्य और हिमपर्वत की उज्जवल आभा,मुख खिला देख दृश को, सुख की …

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केदारनाथ-१- वायु और जल

जीवन के दो मूलाधार, वायु और जल से संसार।वायु मनुज साँसों में लेता, इन साँसों से जीवन बनता,दो साँसों के मध्य श्रेयस में, धन्यवाद वृक्षों का गुनता।वृक्षों का परिवार वनों …

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अपने रूप में रहो!

ज़िंदगी की दौड़ में,मुकाबले औ’ होड़ में,दूसरे से जीतने को दौड़ता!किंतु चक्र में सभी,हैं दौड़ते अभी-अभी,है कौन आगे, किसको पीछे छोड़ता?!ज़िंदगी की दौड़ में,देखो जोड़-तोड़ में,दौड़ किससे जीतते या हारते?!इक …

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तारे और रात की बारिश

संध्या के काले झुरमुट में, रात उतर जब आ जाती है,दिवस उदासा, बड़ा अभागा- आँख अश्रु से भर जाती है।ये अश्रु ही सब तारे हैं।बादल इन मासूम अश्रु के बहने …

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