… तुमको ये क्या हुआ!
मन की खुशी को मैं बाँध नहीं पाता हूँ,और किसी और से मैं बाँट नहीं पाता हूँ;दौड़ूँ मैं, भागूँ मैं, मिलने की जल्दी में,बिछड़े, बरस बीते, जोड़ नहीं पाता हूँ।बातें …
मन की खुशी को मैं बाँध नहीं पाता हूँ,और किसी और से मैं बाँट नहीं पाता हूँ;दौड़ूँ मैं, भागूँ मैं, मिलने की जल्दी में,बिछड़े, बरस बीते, जोड़ नहीं पाता हूँ।बातें …
वासनाओं के वशीभूत हो जब मनुष्य अंधी दौड़ में लग जाता है,तो लाभ और लोभ का अंतर तक भूल जाता है।माँ प्रकृति हर पल हमारे पोषण और कल्याण के लिएअपना …