मृत्यु
साँस जाती है और साँस आती है।यूँ तो ये फासला होता है एक पल का। मगर कभी ये हो जाता है एक अंतहीन फ़ासला ! १९११२१/१९११२१
साँस जाती है और साँस आती है।यूँ तो ये फासला होता है एक पल का। मगर कभी ये हो जाता है एक अंतहीन फ़ासला ! १९११२१/१९११२१
ये सत्य नहीं साकार हो रहा, प्रभु तब तक मैं डोल रहा; ये समझूँ पर वो भी मानूू, ना पकड़ूँ, ना छोड़ रहा।चलता हूँ इक राह पकड़, फिर किस पगडंडी …
न ‘तुम’ हो, न ‘मैं’ हूँ,हैं तो सिर्फ इस ‘तुम’ और ‘मैं’ के अदृश्य भाव। और इन्ही भावों के गुणनफल से हो जाता है अनंत फैलाव। इस फैलाव में कई …
सब कुछ जैसे जम-सा गया है। जमावट तो भीड़ की है, किंतु वो भगदड़ किसी एक जगह जैसे रुकी-सी है।कोई कोलाहल या शोरगुल नहीं है, सब जैसे एक कसी जमावट …