दो विपरीतताओं के बीच
ज़िंदगी दो विपरीतताओं के बीच खड़ी दिखती है-अस्त-व्यस्त-से शोर-गुल के बीचएक गहरा, स्तब्ध-सा सन्नाटा-जहाँ अचानक चलते-चलते मैं थम जाता हूँ।उस उथले शोर-गुल से गुज़रते, थम जाता हूँ सुननेउस निरंतर गहराते …
ज़िंदगी दो विपरीतताओं के बीच खड़ी दिखती है-अस्त-व्यस्त-से शोर-गुल के बीचएक गहरा, स्तब्ध-सा सन्नाटा-जहाँ अचानक चलते-चलते मैं थम जाता हूँ।उस उथले शोर-गुल से गुज़रते, थम जाता हूँ सुननेउस निरंतर गहराते …
ये इतनी आसां बात नहीं, तुम नदी नहा कर मुक्त हुए; ये इतना सरल नहीं रस्ता, तुम मक्का जा आजाद हुए।खुद को पिघलाना पड़ता है, खुद को मिट जाना पड़ता …
उसको अपना पूरा जीवन, भूल-भुलैया लगता है। जिन राहों पर वो बढ़ता है, जिन मोड़ों पर वो मुड़ता है, अंधे राह-मोड़ वो लगते, कभी खिवैया लगता है।उसको अपना पूरा जीवन, …