आध्यात्म व दर्शन
द्विविधा, शिकायत और दर्द के स्वर
जहाँ में काम करना है, जहाँ में हो रहा सब खुद,जहाँ होना है करता हूँ, जहाँ करना है तकता हूँ। जहाँ करने में हक मेरा, वहाँ मैं चूक जाता हूँ, …
पल-पल डग बढ़ते जाओ
पल-पल डग बढ़ते जाओ, पग डग-मग हों सधते जाओ, प्रभु स्वयं दिखाता मार्ग तुम्हें, प्रभु मार्ग-चिह्न पढ़ते जाओ। पल-पल डग बढ़ते जाओ।सौभाग्य बड़ा प्रभु-मार्ग दिखा, साहस प्रभु से उपहार मिला, …
विलय याचना
मैं डूबा हूँ कुंड में जिसमें तेरी ऊर्जा भरी हुई, बह जाता हूँ साथ कभी मैं, शांत कभी मैं पड़ी हुई!मैं खो जाता हूँ तुझमें, जैसे मैं तुझसे अलग नहीं; …





