श्री बद्रीनाथ गिरी
दिन बीता।बीता, दिन के साथ-साथ, जीवन बीता।भोर समय कोहरे ने गिरी का तन ढापा, सूरज के सम्मुख नतमस्तक-पिघला जाता।आदित्य और हिमपर्वत की उज्जवल आभा,मुख खिला देख दृश को, सुख की …
दिन बीता।बीता, दिन के साथ-साथ, जीवन बीता।भोर समय कोहरे ने गिरी का तन ढापा, सूरज के सम्मुख नतमस्तक-पिघला जाता।आदित्य और हिमपर्वत की उज्जवल आभा,मुख खिला देख दृश को, सुख की …
रमण पढ़ो, शंकर पढ़ो, पढ़ो कोई परमहंस,तुझमें ही डूबा दिखे, योगी स्वनिरअंस।प्रभु मेरे, इतनी शक्ति ना मुझमें।प्रभु मेरे, इतनी भक्ति भर मुझमें। पत्तों को नहराता जाऊँ, और स्वयं को छलता …
प्रभु मेरे, मैं तुझे चिठिया भेजूँ। पर नहीं जानूँ तोरा गाँव, नगरवा,का करूँ किस बिध भेजूँ!ओ प्रभु मेरे, मैं तुझे चिठिया भेजूँ।कोई कहत तू जगत समाया,और कहत जग तुझमें बसाया,मैं …