आध्यात्म व दर्शन
द्वंद्व से निर्द्वंद्व की ओर
ये जोर-जबर, ये छीन-झपट,ये ठाँय-ठाँय, ये डाँट-डपट,ये मार-धाड़, ये खींच-तान,हल्ला-गुल्ला, षडयंत्र-कपट।नवभोर हुई, धरती का नव-शृंगार हुआ,चहके पंछी, नव-जीवन का संचार हुआ,मृग-छौनों ने नन्ही-नन्ही आँखें खोलीं,उजला-उजला देखो नव-संसार हुआ!ये खून-खराबा, लूट-मार,धक्कम-धक्का, …
प्रभु! तुम बूँद-बूँद रिसते-से हो
प्रभु! तुम बूँद-बूँद रिसते-से हो बसमेरे भीतर।तुम बाहर तो हो इतने विराट,इतने विस्तृत-और मैं खुला हूँ और खाली भी।यही मान मैं पुकारता हूँ तुम्हे,इस आस में कि तुम आओगे,एक तेज …





