आध्यात्म व दर्शन
दर्द
दर्द गहराई देता है।पर उस दर्द की सतह पर ना रुक जाओ।उतरो उस दर्द की गहराई में;गहरे… और गहरे, तब पाओगे,सिर्फ गहराई है,दर्द तो नदारद है! १८१००८/१८१००८
दो विलाप के स्वर
एक- पुकार तुम कहाँ हो प्रभु! क्या मेरी पुकार इतनी मंद हैकि उसकी ध्वनि तुम्हारे कानों तक पहुँचती नहीं?क्या तुम इतने दूर हो प्रभु,कि तुम्हारी विराट दृष्टि भी मुझ पर …





