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आध्यात्म व दर्शन - अनहद की कलम से

संदेह और धैर्य

कुछ समझ ना पाऊँ प्रभुकहाँ, क्या करता हूँ….क्यूं सोता, क्यूं जगताप्रभु, क्यूँ जीता हूँ?! क्या, मेरा ये करना, ना करना,मुझे तुम्हारे निकट ला रहा है प्रभु?!अवश्य ही ला रहा होगा,किंतु …

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तुझे मेरा प्रणाम

हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम, तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार कर ले!भक्त हूँ तेरा मैं पुकारूँ तुझे, तू आकर मुझे अंगीकार कर ले!हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम, तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार …

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बस, खो जाऊँ तुझमें…

बस, खो जाऊँ तुझमें बस खोता ही जाऊँ!और दिवस-निस क्या करना है, और घड़ी-पल क्या डरना है। बस सुमिरन ही प्रभु तेरा-मैं रमता जाऊँ!बस, खो जाऊँ तुझमें बस खोता ही …

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दो प्रतीक्षा के स्वर

एक- कौन सी दिशा चलूँ? एक विषम चक्र है,घूमता विचित्र है!डोलता सत् की दिशा, पर दीखता असत्य है।प्रेम, मोह गड्डमड्ड,धुंध, स्याह हर तरफ,कौन सी दिशा चलूँ,या बैठना ही गत्य है?! …

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