कितना धीरज!
कितना धीरज…!बूँद-बूँद घट भर जाता है,पर क्या धीरज रख पाता है?!बीते बरस खेत बुआया, बारिश की सहजी आस,खेत दरारें, खेत हो गए, ना आई बरसात।रूठी खेती, रूठा भाग;रोया मन, असुअन …
कितना धीरज…!बूँद-बूँद घट भर जाता है,पर क्या धीरज रख पाता है?!बीते बरस खेत बुआया, बारिश की सहजी आस,खेत दरारें, खेत हो गए, ना आई बरसात।रूठी खेती, रूठा भाग;रोया मन, असुअन …
एक- उम्मीद कुछ समझ नहीं आ रहा!सच में बहुत उम्मीद रहती है हर रोज़…हर रोज़ पर यूँ ही गुज़र जाता है…तेरे इन्तज़ार में बस यूँ चुप हूँ…और इस चुप में …
इस तरफ या उस तरफया बीच में चलता चलूूँ,या बैठ जाऊँ बस यहीं– तूफ़ान ले के उड़ चले या धूप में झुलस पड़े!सब दिशा अदृष्य है,ना कोई कोण दिख रहा,बात …