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आध्यात्म व दर्शन - अनहद की कलम से

तुम आ जाओ, प्रभु

ठहरी, पर अशांत,क्रांत-क्रांत… !समय का पल-पल आँख से गुज़रता…मन को धकियाता-साकुरे‌दता और उग्र करता…पर बेबस मैं…कौन मैं?!मन नहीं।आत्मा नहीं।देह नहीं।फिर कौन?!कौन आभास पाता है, मन की उग्रता का?कौन ग्राह्य करता …

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डायरी के पन्नों से

एक रात बिस्तर में डूब जाती है, आँख दिन भर में ऊब जाती है,खाब देखें तो किसके देखें, दुनिया बेनूर ही नज़र आती है।इस जमाने को तू चलाता है खुदा,मेरे …

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कुछ फलसफ़े

एक- अंतर में प्राण मिला जीवन के मिथ्यापन में, जीवन का राज़ छिपा;जीवन की दौड़-भाग में, जीवन विश्राम छिपा!तुमको जीवन का दर्शन, जीवन के साथ मिला;तुमको जीवन का दर्पण, अंतर …

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अव्यक्त वेदना

एक वेदना है, जो व्यक्त होना चाहती है,पर रह जाती है, अव्यक्त।कई कारण हो सकते हैं उसकेअव्यक्त रह जाने के-व्यक्त कर पाने की कला का अभाव,व्यक्त करने से संभावित संकट …

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