आध्यात्म व दर्शन
प्रेम और फ़लसफ़ा
एक- प्रेम फूलों ने सुर रागिनी छेड़ी, वीणा ने गंध महकाई,प्रीत में रोशन मन ऐसा, अमावस में चाँदनी भर आई! १७१००९ दो- दिशा, दृष्टि की असंभव है सत्य को पाना, …
प्यार के फ़ोहे
बीती बातें बन जाती हैं धुआँ, उड़ जाती हैं आसमान में,बादल बन बरसती है आँख से आँसू की तरह!यादें समंदर की तरह है-गहरे से उमड़ती हैं, टकराती हैं लहर बन …
मन के बाहर
दौड़ती है गाड़ी पटरियों पर,आदमी तो बस सवार है उस पर।करता है संगत उसके हिचकोलों के साथ,डोलता उसकी ही बेताल ताल के साथ!कभी इस गाड़ी के बाहर भी निकल कर …





