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आध्यात्म व दर्शन - अनहद की कलम से

उम्र लगती है समझने को

शब्दों के प्रपंच और तर्को की निरर्थकता-उम्र लगती है समझने को!प्यार अनुभव है व्याकरण नहीं- जिसके बँधे नियम हो।विस्तृत आकाश में बिखरे तारों की चमक-तुम उन्हे गौर कर सकोगीप्यारे पूनम …

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गांभीर्य और गहराई

लम्हा लम्हा वक़्त बदलता है,जीवन अर्थों में साकार-ठोस, कभी पिघलता-सा और कभी धुआँ-धुआँ!छू लेने भर से क्या समझा जा सकता है इसके गांभीर्य का वज़न?! सीढ़ियाँ क्या सिर्फ ऊपर जाने …

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रेत पर लकीरें

तुम जानते हो गम की लकीरों को रेत पर खींचना,पर भूल भी जाते हो इसे इतनी बेदर्दी से !तुमने पारंगत की है ये कला,सहेज कर कैसे रखें इन लकीरों को।”मानव …

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तुम नारी हो

एक करिश्मा हो तुम!तुम हो एक नदी,जो बहती है, जीवन के एक छोर से दूसरे छोर तक-बहने के लिए!बहती है, तमाम ऊबड़-खाबड़ रास्तों से बेखबर,और पा लेती है अपना समुंदर…-हवा …

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