हर वक़्त मैं जवाँ हूँ
था रंग जवानी का औ’ रोशन थी ज़िंदगी,हासिल थी हरिक शै, ना गुलामी ना बंदगी।हर यार कह रहा था, मुकद्दर कमाल है,परवाज़ है फ़लक पे औ’ हासिल है बुलंदी।हर वक़्त …
था रंग जवानी का औ’ रोशन थी ज़िंदगी,हासिल थी हरिक शै, ना गुलामी ना बंदगी।हर यार कह रहा था, मुकद्दर कमाल है,परवाज़ है फ़लक पे औ’ हासिल है बुलंदी।हर वक़्त …
शांत, निस्पृह, मंद…. न कोई हलचल,न ध्वनि कहीं से।न आवेग कोई, न उग्रता का तनिक अंश ही। तूफान का कुछ नाम तक दिखता नहीं…। क्या जल ही सारा तलहटी में …