… और तभी से ये ‘तट’ होगा
ज़िंदगी के तमाम थपेड़ों से जूझते कब विदा हो जाता है प्रेम इस जीवन से, ख्याल ही नहीं रहता…। जब तलक समझ आता है, शून्यता गहन हो जाती है। फिर …
ज़िंदगी के तमाम थपेड़ों से जूझते कब विदा हो जाता है प्रेम इस जीवन से, ख्याल ही नहीं रहता…। जब तलक समझ आता है, शून्यता गहन हो जाती है। फिर …
एक असीम करुणा का नाम है गुरु…! जो स्वयं को मिला वो पूर्ण है, तत्क्षण मोक्षकारक…! किंतु मोक्षपूर्व ज्ञान प्रदान करने की एकमेव चाह…! असीम नमन और वंदन…! मैं भागता हूँ बार-बार,और तुम …