अल्फ़ाज़-ऐ-शुक्रिया
वो साँसें आ रही भीतर,वो साँसें जा रही बाहर;कभी रुक जाए कहीं इक छोर,सोच मैं सहम जाता हूं।परिंदों की खुशी से कूकतीआवाज़ आती है;तेरा सजदा, अरे मौला,कभी क्यों भूल जाता …
वो साँसें आ रही भीतर,वो साँसें जा रही बाहर;कभी रुक जाए कहीं इक छोर,सोच मैं सहम जाता हूं।परिंदों की खुशी से कूकतीआवाज़ आती है;तेरा सजदा, अरे मौला,कभी क्यों भूल जाता …
शुक्र है कि, शुक्रिया काये अदब बाकी अभी,वरना, मदहोशी में गुम ये,नस्ल क्यों सजदा करे!फिर भी कुछ ईमान ज़िंदाबच रहा बाज़ार में,मेरी जेबों में रखे सिक्केगवाही दे रहे!उन ने लूटा …
नानू, नर्मदा और नवकक्ष-नवीन-सी मित्रता, दो पुरातन से परिचितों की!सब नया-नए परिपक्व, प्रेमपूर्ण नानू,नई निरत माँ नर्मदा,और नए परिवेश में सुसज्जित नया कक्ष…!इस नवीनता में हमने अपने प्रेम और श्रद्धा …