प्रेमाश्रु
मैं रोया-और बिखरे ढेर-से आँसू,-उस रोने से!उसने समेट लिए वह आँसू,पवित्र मोती-से! वो रोई-और बिखरा ढेर-सा प्रेम-उस रोने से!उसने समेट लिया वह प्रेम,पवित्र धागे-सा!हम मिले-और बन गई एक पवित्र माला,उन …
मैं रोया-और बिखरे ढेर-से आँसू,-उस रोने से!उसने समेट लिए वह आँसू,पवित्र मोती-से! वो रोई-और बिखरा ढेर-सा प्रेम-उस रोने से!उसने समेट लिया वह प्रेम,पवित्र धागे-सा!हम मिले-और बन गई एक पवित्र माला,उन …
लंबे-लंबे रस्ते चलते-कभी घिसटते, कभी उछलते,कभी कहीं बस थम जाते हम।ऐसे ही अनगिनत रास्ते, हमसे होकर निकल गए हैं,हम भी इनकी सिर रीढ़ों पर,मचल-मचल कर फिसल गए हैं।क्या मंज़िल ये …
और प्रज्ञा जग उठी और बोलती-“एक प्रतिवासी का घर है,एक घर खुद का यहाँ,एक घर परमात्मा का,बस यही ब्रह्मांड है!””तुमने प्रतिवासी के घर को,खुद का घर समझा हुआ है।”भ्रांति तुमको …