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आध्यात्म व दर्शन - अनहद की कलम से

हम तो हैं बंजारे मौला

हम तो हैं बंजारे मौला, हम तो हैं बे-द्वारे मौला, हम तो हैं नदिया की चालें, चल पड़े हरिद्वार मौला।तन्हा-तन्हा घूमते,मस्ती, कभी हम झूमते, सोए रहे अलसाए से,करते हिमालय पार …

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कौन जाने किस सदी से!

वक्त के धागे जुड़े हैंकौन जाने किस सदी से;दिख रहा सागर यहाँ,पर मिल रहा किस-किस नदी से।लम्हा लम्हा यूँ सरकता,यूँ सिसकता बढ़ रहा है, कौन मानेगा जुड़े,परमात्मा या उस नबी …

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अंतर्यात्रा का प्रश्न

ये जानते हुए भी कि ये गलत राह है,मैं बेबस चलता हूँ इस पर,क्योंकि और भी राहें जो दिखती हैं आसपास,वो भी तो सही नहीं जान पड़तीं!और फिर ये इल्म …

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आत्मा में रामलला

प्राण-प्रतिष्ठा अवध में,मचा बड़ा कोहराम, भीतर आँखें फेरिए,मिटें सभी संग्राम।हृदय हमारे रामलला,अभी रहे पाषाण, राम-नाम ना रटन रहे,बने हृदय के प्राण।प्राण-प्रतिष्ठा, हृदय में,कर लो भक्त-सुजान, भीतर की श्री राम से,जागे …

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