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एक अजन्मे को पत्र
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चंद दोहे - अनहद की कलम से

चंद दोहे

राई इतनी लीजिये, ना पहाड़ हो जाए;
खानें में इतनी रहे, पड़े स्वाद बढ़ जाए।

जीरा मुँह में डाल कर, ऊँट की निकली जान,
भोजन इतना तो करो, रहेें देह में प्राण।

अदरख खाकर थूकता, बंदर हो हलकान,
ना जाने गुण से भरी, ना कोई नुकसान।

बंदर हाथों उस्तरा, दिया आदमी जान,
बाल कटें या ना कटें, कटें नाक और कान।

२००३१४/२००३१४