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चंद शेर - अनहद की कलम से

चंद शेर

एक

तुम्हें याद करने की आदत नहीं है, 
तुम्हें भूलने का ना कोई सलीका,
तुम्हारी नज़र राह पर, रहगुजर से-
जुदाई में क्या रस्में-यारी निभाना।

दो

दिल में दर्द होने का 
कोई वक़्त नहीं होता,
एक कमबख्त झोंका भी
उठा देता है जलजला।

कभी सीखी हो इबारते-इश्क
जो तुमने, वर्ना
आँखों का बहना भी
हकीकत नहीं होता।

तीन

आह देते भी हो, 
फिर जश्न मनाते भी हो,
खुद ही देते हो ज़ख्म,
दवा दिखाते भी हो!

यार आइने में रुखसार
तो देखो अपना,
मुस्कुराते हो,
लबों को छिपाते भी हो।

०९११२४/०९११२४