suhas_giten
WhatsApp Image 2025-07-08 at 21.29.45
previous arrowprevious arrow
next arrownext arrow
मन के बाहर - अनहद की कलम से

मन के बाहर

दौड़ती है गाड़ी पटरियों पर,
आदमी तो बस सवार है उस पर।
करता है संगत उसके हिचकोलों के साथ,
डोलता उसकी ही बेताल ताल के साथ!

कभी इस गाड़ी के बाहर भी निकल कर देखो,
जीवन है उसके बाहर एक पूरा -
अपने ही मधुर सुर-ताल से सजा...!

०९०७०९/०९०७०९