दौड़ती है गाड़ी पटरियों पर,
आदमी तो बस सवार है उस पर।
करता है संगत उसके हिचकोलों के साथ,
डोलता उसकी ही बेताल ताल के साथ!
कभी इस गाड़ी के बाहर भी निकल कर देखो,
जीवन है उसके बाहर एक पूरा -
अपने ही मधुर सुर-ताल से सजा...!
०९०७०९/०९०७०९
दौड़ती है गाड़ी पटरियों पर,
आदमी तो बस सवार है उस पर।
करता है संगत उसके हिचकोलों के साथ,
डोलता उसकी ही बेताल ताल के साथ!
कभी इस गाड़ी के बाहर भी निकल कर देखो,
जीवन है उसके बाहर एक पूरा -
अपने ही मधुर सुर-ताल से सजा...!
०९०७०९/०९०७०९