ज़िन्दगी अब उबाऊ हो चली है, इस वीरान दिल में किसी के लिये जगह न बच सकी है अभी; कहाँ हम मोहब्बत किया करते थे कभी, अब यूँ है कि नफ़रत भी नहीं करते! -------------------- जी नहीं लगता हमारा इस जहान में, यूँ तड़पता रहता हूँ मोहब्बत की चाह में, कोई हमें चाहे तो ज़हर ही दे दे, पर पहले उसके प्यार के दो लफ़्ज़ तो कह दे । -------------------- इस देश की ये हालत है किसने बनाई, गरीब खायें जूठन, अमीर मलाई। 'किसी' की' लाज ‘कोई' लूटे, 'किसी' की रुलाई, 'कोई' को उसकी परवा नहीं-- कैसी खुदाई। -------------------- पहले जाते थे जो शाला, अब जाते हैं वो मधुशाला। -------------------- 'अपराध' उसने सह लिया, 'अपराध' कर रही थी वो, इक ज़हर का प्याला, लिए हुए खड़ी थी वो। -------------------- डरा-सा, सहमा-सा, खड़ा था इक वीराने में, 'अब' को देख डर गया, बेहोश हो के गिर गया, मैं देख के समझ गया, छिपा हुआ ईमां था वो। ------------ प्रश्न पूछा मैंने कि मैं किस जगह में आ फँसा, "दोस्तों के बीच में" यह जवाब मिला मुझे। यही प्रश्न फिर सुना कि किस जगह में आ फंसा "दोस्तों के बीच में" वही जवाब मिला उसे। सभी यही थे पूछते…! ---------- एक बार यूँ जो हो गया, तो सौ बार भी क्यूँ न हो। नहीं, इक बार खायी ठोकर, दो बार भी न हो। ---------- प्रथम दृष्टि में तुझसे, किसी बंधन में बँध गया, तेरे काले केश में, मैं कुछ उलझ-सा गया, आँखो को देख मैं यूं मस्त हो गया, मय के दो-चार घूँट मैं, नयनो से पी गया, चेहरे को देख याद आए वो ही नज़ारे-- कँवलो को देख जैसे दिन वो गुज़ारे। ------------ भोला-सा तेरा चेहरा, कातिल तेरी अदाएँ, तेरे वो नाज़ों नखरे, हैं मुझको रिझाएँ। वो चाँदनी की रात, हुई थी मुलाकात, अब तक ना भुला पाया, वो तेरा-मेरा साथ। तेरी बहकी जवानी, कहती थी कहानी, अक्सों में भी लगती थी, तू कितनी दीवानी।