फिर दिन बीता,
फिर रात गई,
कल सुबह हुई
और कल बीता।
कल का फिर अगला कल बीता।
फिर माह गए,
फिर बरस गए,
फिर दशक-शतों का युग बीता,
फिर युग बीते…
पर हम रीते।
०५०८१७/०५०८१७
फिर दिन बीता,
फिर रात गई,
कल सुबह हुई
और कल बीता।
कल का फिर अगला कल बीता।
फिर माह गए,
फिर बरस गए,
फिर दशक-शतों का युग बीता,
फिर युग बीते…
पर हम रीते।
०५०८१७/०५०८१७