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एक अजन्मे को पत्र
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प्रेम और फ़लसफ़ा - अनहद की कलम से

प्रेम और फ़लसफ़ा

एक- प्रेम

फूलों ने सुर रागिनी छेड़ी, 
वीणा ने गंध महकाई,
प्रीत में रोशन मन ऐसा,
अमावस में चाँदनी भर आई!

१७१००९

दो- दिशा, दृष्टि की

असंभव है सत्य को पाना, 
दृष्टि बाहर को हो जब तक-
बंद करने होंगे नेत्र दोनों,
तब ही खुल पाएगा तीसरा शिव-नेत्र!

२६१००९