तुम जानते हो गम की लकीरों को
रेत पर खींचना,
पर भूल भी जाते हो इसे
इतनी बेदर्दी से !
तुमने पारंगत की है ये कला,
सहेज कर कैसे रखें इन लकीरों को।
"मानव तू 'मन' में छुप
‘नव' को भूल गया है"
इतना भर याद आना है तुझे...!
०९०२१८/०९०२१८
तुम जानते हो गम की लकीरों को
रेत पर खींचना,
पर भूल भी जाते हो इसे
इतनी बेदर्दी से !
तुमने पारंगत की है ये कला,
सहेज कर कैसे रखें इन लकीरों को।
"मानव तू 'मन' में छुप
‘नव' को भूल गया है"
इतना भर याद आना है तुझे...!
०९०२१८/०९०२१८