शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना सकुचाहट, ना गर्माहट, ना पिघला, ना बहता। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना रिश्ते के इस स्वरूप पर, तुझे-मुझे कुछ शिकवा, ना इसको कुछ दृढ़ करने की, तेरी-मेरी इच्छा। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता!
२३११०४/२३११०४
शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना सकुचाहट, ना गर्माहट, ना पिघला, ना बहता। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता! ना रिश्ते के इस स्वरूप पर, तुझे-मुझे कुछ शिकवा, ना इसको कुछ दृढ़ करने की, तेरी-मेरी इच्छा। शुष्क, सुन्न-सा रिश्ता!
२३११०४/२३११०४