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तीन प्रेम-गीत - अनहद की कलम से

तीन प्रेम-गीत

एक- अमावस का दस्तूर निभाता है

दरख्तों के झुरमुट से ये कौन गाता है?
मेरे आँसुओं को देख
फूल भी पिघल जाता है!

दिल के इस कोने से ये
किसकी आवाज़ आती है,
देख कर तड़पता मुझे,
तेरी तस्वीर कसमसाती है!

आसमां से कह दो ना चिढ़ाए मुझे,
चाँद मेरा भी है मगर
अमावस का दस्तूर निभाता है!

दो- खुशियाँ ही खुशियाँ हैं

रंगमय जीवन में सुखो की सरगम है,
बाजे मृदंग-ढोल, नाचे मन झूमें!
गोल-गोल फिरकी-सी,
चम-चम चमकार-कर,
घूमती है ज़िंदगी
किरणेें लपेट कर!
सतरंगी नभ में नाचता मयूर देखो,
हतप्रभ हैं बादलों की टोलियाँ
खुशियाँ ही खुशियाँ हैं
बिखरी जहाँ-तहाँ,
ले जाओ भर-भर के झोलियाँ!

तीन- यूँ समझना इसको…

कहूँ के प्यार तुझसे है मुझे-
भिगो के चाशनी में जो कहा
-यूँ समझना इसको!
कहूँ के साथ चाहूँ में तेरा हर पल,
तेज गर्मी में बारिश की
फुहार-सा समझना इसको!
बड़ा मीठा है मेरा प्यार कहना तुझको,
तेरे गालों पे नम होठों की
छुअन-सा समझना इसको!

०९०५२४/०९०५२४