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तुझे मेरा प्रणाम - अनहद की कलम से

तुझे मेरा प्रणाम

हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम, 
तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार कर ले!
भक्त हूँ तेरा मैं पुकारूँ तुझे,
तू आकर मुझे अंगीकार कर ले!
हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम,
तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार कर ले!

तेरी ही आँखों से मैं जग को देखूँ,
तेरे ही कानो से तुझे सुन पाऊँ,
हे परमेश्वराय! भोग तेरा चखूँ,
गंध तेरी भरूँ, मुझे प्यार कर ले!
हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम,
तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार कर ले!

तुझपे ही तज दूँ मैं काम-क्रोध अपना,
तुझपे ही मोह लोभ मन के तजूँ!
हे परमेश्वराय! मद हर ले मेरा,
दूर मन के मेरे तू विकार कर दे!,
हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम,
तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार कर ले!

निर्मल तन, प्रात होत द्वार तेरे आऊँ,
हाथों से अपने तुझी को सजाऊँ,
हे परमेश्वराय! मैं द्विजु बन रहूँ,
तू मुख से मेरे, ओंकार कर ले!
हे परमेश्वराय! तुझे मेरा प्रणाम,
तुझे मेरा प्रणाम, स्वीकार कर ले!

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