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एक अजन्मे को पत्र
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यारा खूब खिला करते - अनहद की कलम से

यारा खूब खिला करते

वही रेत है, वही घड़ी है, 
वही सरकना चुपके से,
बार-बार उल्टा-पुल्टा कर,
यार खूब मिला करते।

बरसों बाद मिले तुम सबसे,
पर जैसे कल का नगमा;
जिसे साथ में, सुर में गाकर,
यारा खूब खिला करते।

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