वही रेत है, वही घड़ी है,
वही सरकना चुपके से,
बार-बार उल्टा-पुल्टा कर,
यार खूब मिला करते।
बरसों बाद मिले तुम सबसे,
पर जैसे कल का नगमा;
जिसे साथ में, सुर में गाकर,
यारा खूब खिला करते।
२३०५०५२३०५०५
वही रेत है, वही घड़ी है,
वही सरकना चुपके से,
बार-बार उल्टा-पुल्टा कर,
यार खूब मिला करते।
बरसों बाद मिले तुम सबसे,
पर जैसे कल का नगमा;
जिसे साथ में, सुर में गाकर,
यारा खूब खिला करते।
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