तुम्हारा साथ,
हमारी बात
और जज़्बात!
और जब बात,
बिना जज़्बात,
तुम्हारा साथ-
ये कैसा साथ!
मोह छूटा,
तो छूटा...
साथ में भी
संग का अहसास।
वो रहना साथ भी लेकिन,
ना कोई राग,
ना कोई प्यास...
ये क्या अहसास!
कहीं कुछ खो गया जैसे,
जिसे मुश्किल से पाया हो।
वो दिखता पास,
जगाता आस,
बढ़ा कर हाथ
जो छूने को-
ना छू पाता...
नहीं वो पास,
ये कैसी आस,
ये क्या अहसास...!
२५०२२५/२५०२२५





