हमारे देवता तुमसे,
ज़रा सी बात कहते हैं,
कि इन्सां हो, औ’ इन्सां की
तरह व्यवहार तो कर लो।
नहीं जो शान दे सकते,
किसी इन्सां को इन्सां की,
तुम उससे जानकर शैतान-सा
बर्ताव ना कर दो।
तुम्हें आदत है खुद को ही,
ज़रा हटकर समझने की,
रहो हटकर-- नहीं मुश्किल--
राह हमको भी चलने दो।
ये पैग़ामे-मोहब्बत
ग्रंथ सारे, दे रहे यारों,
अलग इस भीड़ से हट कर,
ज़रा पैगाम तो पढ़ लो।
२५०२२५/२५०२२५





