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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

दर्द

दर्द गहराई देता है।पर उस दर्द की सतह पर ना रुक जाओ।उतरो उस दर्द की गहराई में;गहरे… और गहरे, तब पाओगे,सिर्फ गहराई है,दर्द तो नदारद है! १८१००८/१८१००८

ओंकार

इस ‘ॐ’ नाद के करने से, पाषाण शिलाएँ टूट रहीं;मन चट्टानों के ढहने से, ओंकार ध्वनि ही गूंज रही।अंतरतम के स्पंदन हैं, ओंकार नाद की टकराहट;कुछ पिघला, शीतल बहता है, …

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दो विलाप के स्वर

एक- पुकार तुम कहाँ हो प्रभु! क्या मेरी पुकार इतनी मंद हैकि उसकी ध्वनि तुम्हारे कानों तक पहुँचती नहीं?क्या तुम इतने दूर हो प्रभु,कि तुम्हारी विराट दृष्टि भी मुझ पर …

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संदेह और धैर्य

कुछ समझ ना पाऊँ प्रभुकहाँ, क्या करता हूँ….क्यूं सोता, क्यूं जगताप्रभु, क्यूँ जीता हूँ?! क्या, मेरा ये करना, ना करना,मुझे तुम्हारे निकट ला रहा है प्रभु?!अवश्य ही ला रहा होगा,किंतु …

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