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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

अनंत मौन

ऐसा कहते हैंकि ये सृष्टि, बहुत सुंदर,बहुत अनुपम और बहुत अद्‌भुत है;और बहता है यहाँ हर ओर,बेहद सुंदर संगीत।किंतु प्रभु!इस अनुपम, अदभुत औरसुंदर सृष्टि को, तुमनेकिस उपक्रम से रचा है,जबकि …

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द्वंद्व से निर्द्वंद्व की ओर

ये जोर-जबर, ये छीन-झपट,ये ठाँय-ठाँय, ये डाँट-डपट,ये मार-धाड़, ये खींच-तान,हल्ला-गुल्ला, षडयंत्र-कपट।नवभोर हुई, धरती का नव-शृंगार हुआ,चहके पंछी, नव-जीवन का संचार हुआ,मृग-छौनों ने नन्ही-नन्ही आँखें खोलीं,उजला-उजला देखो नव-संसार हुआ!ये खून-खराबा, लूट-मार,धक्कम-धक्का, …

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प्रभु! तुम बूँद-बूँद रिसते-से हो

प्रभु! तुम बूँद-बूँद रिसते-से हो बसमेरे भीतर।तुम बाहर तो हो इतने विराट,इतने विस्तृत-और मैं खुला हूँ और खाली भी।यही मान मैं पुकारता हूँ तुम्हे,इस आस में कि तुम आओगे,एक तेज …

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गुफ्तगू

लिखने का कुछ सलीका-सा नहीं है।लिखता हूँ बेसाख्ताअपनी ही किसी रौ में।कभी तुक में, कभी बेतुका,कभी लय में, और कभी अनगढ़ा!बस यूँ हीं बेफ़िक्र, बे-शऊर लिखता हूँ,बस खुदी से कुछ …

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