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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

विरह के आँसू

मैंने बनाई है अपने आँसुओं से इक माला-उन आँसूओं से जो निकले थे तुम्हारे विरह में।तुम आओ तो पहना दूँ उसे तुम्हारे गले में। तुम उसे उतारना मत,छूने देना उसके …

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तीन प्रेम-विरह गीत

एक- ये चाँद अपने गाँव भी यही चाँद ले जाना -मैं याद रहूँगा!कभी अमावस में भी आसमाँ मे टाँक देना..!मैंने तारों को मना लिया हैऔर झील को समझा दिया है.!! …

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अधूरा साथ

सीपियों ने बिताई है तमाम उम्र शंख के साथ,शंख की ध्वनि का उन्हे, अनुमान पर नहीं।लहरों ने कब छोड़ा है समंदर का साथ?उसकी गहराई का उन्हें, अंदाज़ पर नहीं।आईनों ने …

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तीन प्रेम-गीत

एक- अमावस का दस्तूर निभाता है दरख्तों के झुरमुट से ये कौन गाता है?मेरे आँसुओं को देख फूल भी पिघल जाता है!दिल के इस कोने से ये किसकी आवाज़ आती …

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