तुम और मैं!
एक नंगे पाँव रेत पर समंदर की,हम साथ चले हाथों में हाथ लिए!कभी दौड़ कर लहरों से खेलें,कभी साथ-साथ गुनगुना ही लिए-“कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है…!” दो चतुर्थी …
एक नंगे पाँव रेत पर समंदर की,हम साथ चले हाथों में हाथ लिए!कभी दौड़ कर लहरों से खेलें,कभी साथ-साथ गुनगुना ही लिए-“कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है…!” दो चतुर्थी …
तुम कहाँ हो?बारिश में भीगी मिट्टी की महकतुम्हारी देहगंध सी क्यों लगती है?क्या तुम कहीं आस-पास ही हो?हवा की इस छुअन में क्यों होता हैतुम्हारे स्पर्श का अहसास?क्यूँ रात के …
प्रेम के गणित में उलझे हुए तुम, फायदे की बात ही करते रहे।फूल प्लास्टिक के लगाए फिर रहे हो, चीखते हो खुशबूएँ गुम हो गई हैं।तुमने बस अक्सों में ही …