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एक अजन्मे को पत्र
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SUHAS MISHRA - अनहद की कलम से

बातों की टोली

ये बातों की टोली है,अलग-अलग तरह की इसमें बाते हैं।कुछ रसीली, खटमिट्ठी-जिन्हें सुनकर, याद आ जाता होप्यारा-सा बचपन,और नम हो जाती हो, हमारी आँखे।कुछ बेसिर पैर की बातें,याद करा देती …

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रहो ‘रियल’ बस यही फ़र्ज़ है!

शब्द अलग हैं, अर्थ ‘सेम’ है, गीत अलग दो, तर्ज़ एक है, गाते हो कितना भी सुर में, नकली है जो ‘ट्यून’ ‘फेक’ है!चलती हैं वो साथ मगर दो ‘लाइंस’ …

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अपने रूप में रहो!

ज़िंदगी की दौड़ में,मुकाबले औ’ होड़ में,दूसरे से जीतने को दौड़ता!किंतु चक्र में सभी,हैं दौड़ते अभी-अभी,है कौन आगे, किसको पीछे छोड़ता?!ज़िंदगी की दौड़ में,देखो जोड़-तोड़ में,दौड़ किससे जीतते या हारते?!इक …

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सृजन

‘सृजन’ तुम जन्मने के पहले ही जन्म ले लेते हो।तुम्हारे साक्षात अस्तित्व में आने के पहले-सृजन की पीड़ा तो कभी पहले ही शुरू हो चुकी होती है!तुम्हारे साक्षात होने कासंभावित …

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